Tuesday, October 23, 2012

वक्त के हाथों एक मै खिलौना

वक्त के हाथों एक मै खिलौना मानता हूँ.
बुलबुला पानी का मेरी औकात जानता हूँ,

धुप हवा मेरी जान के दुश्मन मानता हूँ,
हैं पानी संग मेरा रिश्ता आबाद जानता हूँ.

आज जिएँ कल मरना है ये सच मानता हूँ,
दो पलका क्षणिक मेरा जीवन जानता हूँ.

हँसके मुझे है जान छिड़कना मानता हूँ,
हवा संग कैसे घुल मिल जाना जानता हूँ .

ख़ुद को खोके बच्चोको हँसता मानता हूँ,
ना कही किसी हाथो में रुकना जानता हूँ .

रेखा (सखी ) 

 

વૃક્ષ જાતે બન્યું બંજર

ચાર બુંદોની ફુહાર વૃક્ષને ફૂટી એક કુંપળ,
બે જણ્યા નવતર લીલુડા પાન અતિ કોમળ.
ખેચી સઘળો રસકસ સીચ્યાં બાળ હરપળ,
એક હવાની લહેરખી પત્તા ઉડવાને તત્પર,
સમય ની પાનખર વૃક્ષ જાતે બન્યું બંજર.:(
રેખા (સખી )

એક એવી અલૌકિક નજર

એક એવી અલૌકિક નજર તું આપજે જરૂર.
ફક્ત તનેજ ત્રિલોકે સઘળે બસ જોવે જરૂર,
એક દિવસ પરલોકે મળવા આવીશ જરૂર,
તું છે જ્યાં ત્યાનું સરનામું પ્રભુ આપજે જરૂર.
રેખા

फुलोसे ही गुलदस्ता बनता है

किसने कहे दिया फुलोसे ही गुलदस्ता बनता है
सलीके से तराशे तो पत्थर भी सुन्दर लगता है.

जब अपनो का साथ हो हर दर्द दवा बनती है
दिलमें भरा हो प्यार तो घर खुदाका लगता है

ग़मों से निढाल दिलमे प्यारसे हौसला बढ़ता है
तुम्हारे आने से आलम सारा बदला लगता है
 
जहान भरकी भले ही हमने की शेरो सायरी है
एक तेरे गुनगुनाने से हर बोल ग़ज़ल लगती है
 रेखा (सखी ) 10/23/12

 

કોણ કહે છે આત્માને નિરાકાર

હું શાને નાં કરું આટલો અહંકાર
જગતનાં સ્વામીને મેં ચીતર્યો આજ.

ઉગતા નો સહુ કરે છે જયકાર
સુર્ય ચંદ્ર ને પડછાયે મેં નોતર્યા આજ.
 
કોણ કહે છે આત્માને નિરાકાર
અહં બ્રમ્હ ને હાથે કરી મેં છેતર્યો આજ.
 
શું લખશે વિધાતા મારા નશીબ માં
રેખા બની બધે હથેળીમાં પ્રસર્યો આજ.

શબ્દોમાં હું શું વધુ ઓળખ દઉં મારી
અંતે સીતાજી જેમ અગ્નિમાં પ્રવેશ્યો આજ.
રેખા (સખી) 10/18/12
 

एक वहेम था हमें

एक वहेम था हमें सायद कभी मिलोगे तुम
भूलकर सब रस्मो रिवाज चले आओगे तुम

जिंदगी सूखे पत्तो का ढेर है जानते हो तुम.
फिरभी आग इश्क की इनमे लगाते हो तुम.

ख़्वाब जिन्दगी भरका जो इन आखों ने देखा,
आप बेवक्त अश्कों गिराके उन्हें घुलते हो तुम.

कुछ और तो सरकार आपको अब आता नहीं,
फिरसे जाकर इश्क में इंतजार कराते हो तुम.
रेखा (सखी ) 10/15/12

Thursday, September 27, 2012

एक उदास लड़की

बहुत-सी लड़कियों की क़तार में
वह एक उदास लड़की....

वो हँसती है लेकिन उदासी छलकाती हुई
जमाने से बचते बचाते
संजोयी थी उसने प्यारसे कुछ हसीन यादें.
...
लेकिन पन्ने पर लिखी बातो की तरह,
समेट नहीं पाती थी उन बिछड़ी यादो को .
महसूस करती में भी उसीका एक हिस्सा बनकर.
बहुत-सी लड़कियों की क़तार में
वह एक उदास लड़की....

समजती है वो भी भरती ओट का सिलसिला,
बरसते पानी को देखकर,
उठी मनमे उसीके एक लहर नई,
सजाती है फिर हर्षित हुई सपने नए.
वर्षा की बूँदों को छूने खोली जैसे बंध खिड़की,
वे सारी बूँदें उसके ही आँखों से बह निकलीं...
रूलाती गई मुझे भी करके मन मेरा गिला.
बहुत-सी लड़कियों की क़तार में
वह एक उदास लड़की....

मैं भी पलभर के लिए इसका हिस्सा बन जाती हु.
रेखा (सखी )
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